तारों पे नज़र है, ख्वाबों पे बसर है
सपनो सी दुनिया, जादू सा शहर है
कभी नही थमता
खो ना जाऊं राहों में....कहाँ हूँ.....
अपनी धुन्द में गाये
और कुछ सुना ना जाये
नए एक ढंग में है जिन्दगी
नए मंज़र नए रंग के निशाँ
चहरे बिखरे हैं हर कहीँ
जब जब गयी मेरी नज़रें जहाँ
जग-मग जग-मग है रौशनी
चम्-चम् चमकी गली गली
कोई बुरे सपनो को चल के कहीँ
पूछे कहॉ दिल कि है राहें
तारों पे नज़र है....ख्वाबों पे बसर है
सपनो सी दुनिया, जादू सा शहर है
कभी नही थमता
खो ना जाऊं राहों में......कहाँ हूँ......
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